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कविता कोष से "साभार"

खुलता नहीं है हाल किसी पर कहे बग़ैरपर दिल की जान लेते हैं दिलबर कहे बग़ैर मैं क्यूँकर कहूँ तुम आओ कि दिल की कशिश से वोआयेँगे दौड़े आप मेरे घर कहे बग़ैर क्या ताब क्या मजाल हमारी कि बोसा लें लब को तुम्हारे लब से मिलाकर कहे बग़ैर बेदर्द तू सुने ना सुने लेक दर्द-ए-दिल रहता नहीं है आशिक़-ए-मुज़तर कहे बग़ैर तकदीर के सिवा नहीं मिलता कहीं से भी दिलवाता ऐ "ज़फ़र" है मुक़द्दर कहे बग़ैर

सॅंटा और बँटा

क्या तुम उड़ सकते होक्या संजीवनी बूटी ला सकते होसीना चीर के दिखा सकते होनही नाबेटा सिर्फ़ शकल बन्दर जैसी होने से कोई "हनुमान जी" नही बन सकतालड़का: जानेमन इस दिल में आजालड़की: सेंडल निकालू क्या?लड़का: अरे पगली...ये मंदिर नही है ऐसे ही आजा.....लड़का: मुझसे शादी करोगी..लड़की: क्या??लड़का: अच्छी फ़िल्म है ना..लड़की: कुत्ते के बच्चे..लड़का: क्या??लड़की: कितने अच्छे होते है ना..एक लड़की ने एक सिक्का डालके अपना वजन देखा 58kgसेंडल उतारी 56kgजैकेट उतारी 53kgफिर दुप्पटा उतरा 52kgऔर उसके बाद सिक्के ख़त्म हो गए1 भीकारी बोला तू चालू रह सिक्के मैं दूंगा.संता : कुत्ते की पूछ को एक पाइप में ज़बरदस्ती डाल रहा था.बँटा : ओये, कुत्ते की दुम कभी सीधी नही होती.संता : बेवकूफ, मैं तो पाइप बंद कर रहा हूँ.

हंस लो भाई ...

एक करोड़पति मर गया और स्वर्ग का दरवाजा खटखटाने लगा।देव : कौन हो तुम ?करोड़पति : मैं धरती पर करोड़पति था । मुझे स्वर्ग में प्रवेश चाहिये।देव : स्वर्ग में रहने लायक तुमने कौन सा काम किया है ?करोड़पति : मैंने एक बार एक भूखी भिखारिन को दो रुपये दिये थे। एक बार मेरी कार से टकराकर घायल हुए एक बच्चे को एक रुपया दिया था ....देव : और कुछ किया ?करोड़पति : और कुछ तो याद नहीं आता ......देव (दूसरे देव से): भाई, क्या करें इसका ?दूसरा देव : इसके तीन रुपये लौटाकर नरक में भेज दो ..............

प्रेरक प्रसंग

लोकोपदेशक प्रसंग एक व्यक्ति के तीन बच्चे थे। उनके बारे में वह हमेशा चिंतित रहता था । एक दिन वह अपने तीनो बच्चों को लेकर एक बहुत ही पहुंचे फकीर के पास गया । फकीर ने उसके आने का कारण पूछा तो उसने बताया कि ये तीनो उसके बच्चे है वह इनके गुणों और इनके भविष्य के बारे में जानना चाहता है। फकीर ने बात को समझा और उन बच्चो को प्यार से बुलाया और उन तीनो को दो-दो केले दिए और खाने के लिए कहा। बच्चो ने तो केले खूब मजे से खा लिए पर एक ने केले खाकर छिलके सड़क पर फ़ेंक दिए। दुसरे ने कूड़ादान खोजा और उसमे जाकर डाल दिया और तीसरा बच्चे ने वह छिलके गाय को खिला दिया। अब फकीर ने उनके पिता से कहा- "तुम्हारा पहला बच्चा मुर्ख और उदंड ,दूसरा बच्चा गुणी और समझदार और तीसरा बच्चा सज्जन और उदारचेता बनेगा ।" तब पिता ने पूछा कि आपने कौन सा गणित लगाकर आख़िर ये भविष्यवाणी की । फकीर ने जबाब दिया "व्यवहार कि गणित से बढ़कर निर्धारण करने का और कोई उपाय नही होता आप जैसा आचरण करते है वैसा ही बनते भी है।